Posts

कविता - आँगन के पुष्प

Image
                                            मेरे आंगन के प्यार पुष्प ,  कुछ इधर पड़े कुछ उधर पड़े। कुछ बिखर गए कुछ खड़े रहे,  कुछ नीर-वात में सड़े हुए। कुछ तीव्र वृष्टि में उजड़ गए,  कुछ तेज हवा में उखड गए, कल तक जो मेरे पास रहे.  वे क्षड़ भर में ही नष्ट हुए। मेरे आंगन के प्यार पुष्प,  कुछ इधर पड़े कुछ उधर पड़े।। ....१ वे टूट गए हिय लूट गए,  मन रूठ गए तन शिथिल हुए । अपने दिल की तो बात रही.  औरों के दिल भी पिघल गए। रस-छंद भरे मेरे प्रसून,  कुछ टूट गए कुछ व्यथित हुए। मेरे आंगन के प्यार पुष्प,  कुछ इधर पड़े कुछ उधर पड़े।। .....२ कुछ शब्द पुष्प की मालाएं,  पर बनी हुई थी रचनाएँ। जीवन को मेरे सवारी थीं,  मन उदधि क्षीर सी धराये। पल दो पल की बस बात रही.  छवि अस्त दीप्ति सब तमित हुए। मेरे आंगन के प्यार पुष्प,  कुछ इधर पड़े कुछ उधर पड़े।। ....३           ...

कविता-विचार मीमांसा

Image
                                                                                                                                                         विचार-मीमांसा                  जब मूर्त रूप लेंगे विचार तब तेज पुंज विकसित होगा ,                  कलि के कलुषी मतभेदों पर फिर वज्र ज्वाल वृष्टित होगा ,                  मन-बुद्धि-चित्त तीनों मिलकर सच्चाई को पहचानेंगी,                  मृगतृष्णा रुपी आडम्बर को कुण...

कविता- कर्म पथ

Image
                                                                                                                                        कर्म-पथ  पथ प्रदर्शन मार्ग,  दृष्टी कर्म पथ से जोड़ लेना, हर मुसीबत आंक लेना पथ को पहले भांफ लेना, और धरती से गगन का रास्ता तुम नाप लेना।। पथ प्रदर्शन  .......... सत्यता पर अडिग होकर कर्म-पथ पर जो चले हैं, मार्ग की कठिनाइयों को तोड़कर आगे बढ़े हैं, बस उन्ही को देखकर निज मार्ग अपना समझ लेना।। पथ प्रदर्शन  ........... मार्ग की कठिनाइयों में जीत हर इक है तुम्हारी, हर मुसीबत गा रही है जीत है तेरी कहानी, बस मुसीबत देखकर निज पैर पीछे कर न लेना।। पथ प्रदर्शन  ............ ...